संदेश

जनवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राइट टू वाटर... साढ़े 22 हजार करोड़ की लागत से एक करोड़ लोगों के घर तक नल से पहुंचाएंगे पानी

भोपाल.  ‘राइट टू वाटर’ के तहत प्रदेश के करीब एक करोड़ लोगों के घर तक नल से पानी पहुंचाने की कवायद चल रही है। इसके लिए जल निगम ने साढ़े 22 हजार करोड़ रुपए की डीपीआर बनाई है। इस योजना के लिए आईआईटी, दिल्ली के विशेषज्ञों की सलाह ली गई है। प्रदेश के 14 हजार से ज्यादा गांवों काे इस योजना में शामिल किया गया है। गौरतलब है कि समूह नल-जल की करीब 6672 करोड़ रुपए की 39 योजनाओं का काम पहले ही चल रहा है। यह काम वर्ष 2022 तक पूरा किया जाना है। इससे 6091 गांव की लगभग 64 लाख आबादी को घर में ही नल से पेयजल मिलेगा। योजना में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। योजना एक नजर 14510 गांव योजना में शामिल  45 नल जल योजनाओं से पहंुचाएंगे पानी 04 साल में काम पूरा करने का लक्ष्य राशि का गणित 5000 करोड़ के कामों के टेंडर फरवरी में जारी होंगे 45-45% खर्च वहन करेंगे केंद्र और राज्य 10% राशि जनसहयोग से जुटाएंगे सरकार अपना लक्ष्य पूरा करेगी हमने योजना के लिए अगले चार साल का लक्ष्य तय किया है। राज्य के मद से जल्द ही पांच हजार करोड़ रुपए के टेंडर जारी कर रहे हैं। आगे के...

हॉकर्स कॉर्नर नहीं हो सके शुरू, नतीजा- शहर में जगह-जगह लगी हैं गुमठियां

भोपाल .  शहर को गुमठी मुक्त करने के लिए दो करोड़ रुपए खर्च करके हॉकर्स कॉर्नर बनाए हैं। स्मार्ट सिटी कंपनी बोर्ड ऑफिस चौराहे से ज्योति टॉकीज तक 7 करोड़ से स्मार्ट स्ट्रीट डेवलप कर रही है। इसमें स्ट्रीट वेंडर्स के लिए मार्केट तैयार हो गया है। लेकिन इतनी राशि खर्च करने के बाद भी सड़कों पर गुमठियां नजर आ रहीं हैं, क्योंकि हॉकर्स कॉर्नर का आवंटन नहीं हो सका है।  शहर को गुमठी मुक्त करने के लिए नगर निगम ने तीन साल पहले हॉकर्स नीति बनाई थी। इसके तहत हर वार्ड में एक हॉकर्स कॉर्नर बनाया जाना था। ताकि गुमठी व्यवसायियों को उसमें जगह दी जा सके। इसके आवंटन की प्रक्रिया भी तय की गई थी। ज्यादातर वार्डों में हॉकर्स कॉर्नर तो बन गए। लेकिन आवंटन नहीं होने से यह खाली पड़े हैं और शहर में गुमठियों की भरमार है। पिछले साल अगस्त में गुमठी मुक्त किए गए एमपी नगर में फिर से गुमठियां लगने लगी हैं। जिन गुमठियों को क्राइम ब्रांच के पास जगह आवंटित हो गई है, उनमें से कुछ दोनों जगह संचालित हो रही हैं। जोन स्तर पर सर्वे के बाद बनेगी सूची  जिन स्थानों पर हॉकर्स कॉर्नर बने हैं। वहां के गुमठी संचालकों की सूची जो...