इस वजह से किसानों के सामने झुकी मोदी सरकार
स्टेड डेस्क- गतिरोध खत्म करने के लिए बेताब सरकार उम्मीद कर रही थी कि यह प्रस्ताव काम करेगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका । गुरुवार को चर्चा के बाद किसान यूनियनों ने कृषि कानूनों को स्थगित करने के सरकार के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया । गतिरोध खत्म करने के लिए बेताब सरकार उम्मीद कर रही थी कि यह प्रस्ताव काम करेगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका । सरकार द्वारा 18 महीने तक कानून को स्थगित करने के प्रस्ताव के पीछे पांच वजह गिनाई जा रही हैं :
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1. सुप्रीम कोर्ट का कानूनों को लागू होने से रोकना -12 जनवरी के आदेश में शीर्ष अदालत ने कृषि कानूनों को लागू किए जाने पर रोक लगा दी थी । ऐसा कम ही होता है कि कोर्ट संसद के बनाए कानून पर रोक लगा दे । कई नेताओं का मानना है कि कोर्ट का पैनल बनाना इस ओर इशारा है कि समाधान जल्द से जल्द हो । कुछ नेता इस तरह कोर्ट की दखल को सही नहीं मान रहे हैं ।
2. वहीं , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कहना है कि सरकार को किसानों के साथ संवेदनशीलता के साथ पेश आना चाहिए । द इंडियन एक्सप्रेस को दिए साक्षात्कार में संगठन के सुरेश भैया जी जोशी ने कहा , दोनों पक्षों को समाधान करने के लिए प्रयास करना चाहिए और एक आम राय बनानी चाहिए । कहीं न कहीं संघ का भी मत है कि सरकार किसानों से संवेदनशीलता के साथ पेश नहीं आ रही है । जोशी ने कहा कि किसी भी विरोध का इतना लंबे समय तक चलना अच्छी बात नहीं है । संघ चाहता है कि मुद्दे का जल्द समाधान हो । एक बीजेपी नेता ने बताया कि इसका अर्थ है कि संघ मौजूदा स्थिति से खुश नहीं है । संघ भी नहीं चाहता है कि उसके लोग इस मुद्दे पर बंटें ।
3. संघ नेतृत्व का कृषि कानूनों पर सरकार को खुला समर्थन न होना बीजेपी के अंदर उन विरोध की आवाजों को मजबूती दे सकता है जिनका मानना है कि सरकार को कानूनों पर अधिक विचार विमर्श करना चाहिए था ।
4. 26 जनवरी पर ट्रैक्टर परेड- सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड दिल्ली में होगी कि नहीं ये दिल्ली पुलिस को तय करना है । बीजेपी के एक नेता के मुताबिक सरकार नहीं चाहती है कि 26 जनवरी को किसान ट्रैक्टर मार्च करें । सरकार के लिए ये शर्मिंदगी की बात हो सकती है । इसलिए सरकार जल्द से जल्द मुद्दे का निपटारा चाहती है । अगर किसान परेड करते हैं तो सारा ध्यान किसानों की परेड की ओर ही जाएगा जो कि सरकार नहीं चाहती है ।
5. 29 जनवरी से बजट सत्र की शुरुआत होनी है । कृषि कानूनों के मुद्दे पर इस दौरान विपक्ष पूरी तरह से सरकार पर हमलावर रहेगा । एक नेता ने बताया , कई पार्टियों ने किसानों को अपना समर्थन दिया है , कृषि कानूनों के मुद्दे पर बीजेपी संसद में अकेली भी पड़ सकती है । विपक्ष के लिए सरकार के खिलाफ एकजुट होने का ये बड़ा मौका साबित हो सकता है । भले ही सरकार के पास बहुमत हो लेकिन सरकार को किसी भी तरह की विपक्षी एकता रास नहीं आएगी ।
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